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ग्लोबल 6G पहल से जुड़ा भारत, अमेरिका समेत 25 देश तय करेंगे अगली पीढ़ी की तकनीक की दिशा

 भारत ने अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक यानी 6G के विकास और वैश्विक मानकों को आकार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाली उस अंतरराष्ट्रीय पहल का हिस्सा बन गया है, जिसमें अमेरिका के साथ कुल 25 देश 6G तकनीक के भविष्य को लेकर सहयोग करेंगे।




इस पहल का उद्देश्य 6G नेटवर्क से जुड़ी तकनीक, सुरक्षा, मानकों और भविष्य की तैनाती को लेकर समान दृष्टिकोण विकसित करना है। 5G के बाद आने वाली 6G तकनीक को अधिक तेज, कम विलंबता वाली और AI आधारित कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की भागीदारी ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के प्रमुख देश 6G की तकनीकी दिशा और वैश्विक मानकों में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सहयोग के जरिए भारत को नई तकनीकों के विकास, शोध और वैश्विक मानकीकरण की प्रक्रियाओं में अपनी विशेषज्ञता और प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर मिलेगा।

भारत पहले से ही Bharat 6G Alliance के माध्यम से स्वदेशी 6G इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रहा है। जुलाई 2026 तक इस गठबंधन में 90 सदस्य शामिल हो चुके थे, जिनमें दूरसंचार कंपनियां, उपकरण निर्माता, स्टार्टअप, शोध संस्थान और अकादमिक संस्थान शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को 6G तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचाना है। भारत ने 6G से जुड़े वैश्विक पेटेंट में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की महत्वाकांक्षा भी व्यक्त की है।

इस वैश्विक साझेदारी को भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे देश को भविष्य की डिजिटल कनेक्टिविटी, AI-आधारित नेटवर्क और उन्नत दूरसंचार तकनीकों के विकास में अपनी भूमिका और मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

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