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भारत-इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता लागू

 भारत-इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता लागू
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआइए) शनिवार से लागू हो गया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश वातावरण सुनिश्चित करेगा।




साथ ही सीमा पार निवेश गतिविधियों में वृद्धि होगी। दोनों देशों ने इस समझौते पर पिछले वर्ष आठ सितंबर को हस्ताक्षर किए थे।
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता

मंत्रालय ने बताया कि समझौते के तहत भारत ने इजरायली निवेशकों के लिए स्थानीय उपायों की समाप्ति अवधि को तीन वर्षों तक सीमित कर दिया है।

स्थानीय उपायों का मतलब है कि निवेशकों को पहले मेजबान देश की कानूनी प्रणाली का उपयोग करके अपने विवादों को हल करने का प्रयास करना होगा। इसके बाद ही वे वे मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में ले जा सकेंगे।

सामान्य तौर पर भारत के लिए यह अवधि पांच वर्ष होती है। भारत-इजरायल बीआइए में पोर्टफोलियो निवेश भी शामिल है, जो पिछले ऐसे समझौतों से बिलकुल अलग है।

इजरायल पहला आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) सदस्य है, जिसके साथ भारत ने यह समझौता किया है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत को इजरायल से 37.13 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) मिला है।

आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआइ) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि इजरायल के साथ ताजा समझौते में पोर्टफोलियो निवेश को शामिल करने से पारंपरिक एफडीआइ अलग कुछ वित्तीय निवेशों को बढ़ा सकता है।

पोर्टफोलियो निवेश में शेयर, स्टाक व अन्य इक्विटी होल्डिंग, योग्य बांड, डेट और अन्य कारपोरेट ऋण शामिल हैं।
एफटीए पर भी वार्ता कर रहे दोनों देश

इस समझौते का लागू होने इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण एफटीए वार्ता की गति धीमी है।

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