आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हुआ BRICS

 आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हुआ BRICS
दिल्ली में आयोजित 11वीं वार्षिक BRICS काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) बैठक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त और एकजुट वैश्विक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) राजदूत सिबी जॉर्ज ने बैठक को संबोधित करते हुए सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की गंभीर चिंताओं को प्रमुखता से उठाया।




सीमा पार आतंकवाद पर दुनिया को चेतावनी
अपने संबोधन में सिबी जॉर्ज ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की चुनौती है। उन्होंने सभी देशों से आतंकवाद के हर स्वरूप और उसके नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की अपील की। भारत ने साफ कहा कि जो देश आतंकवादियों को शरण, समर्थन और संरक्षण देते हैं, उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद को लेकर वैश्विक मंचों पर आवाज उठा रहा है।

नई तकनीक और फंडिंग बने बड़ी चुनौती
बैठक में आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई गई। भारत ने कहा कि आतंकवादी संगठन अब नई और उभरती तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि फंडिंग के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। कट्टरपंथ और ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन को बड़ी चुनौती बताते हुए भारत ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही 'जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट टेररिज्म' को वैश्विक नीति का आधार बनाने की अपील की गई।

वैश्विक आतंकवाद विरोधी ढांचे को मजबूत करने पर जोर
भारत ने BRICS देशों से मौजूदा वैश्विक आतंकवाद विरोधी ढांचे को और प्रभावी बनाने के लिए सक्रिय, व्यापक और लगातार प्रयास करने का आह्वान किया। सिबी जॉर्ज ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अधूरी रहेगी। उन्होंने BRICS काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप को भविष्य के खतरों के लिए अधिक मजबूत, इनोवेटिव, समावेशी और परिणाम-उन्मुख बनाने की जरूरत पर बल दिया।

आतंकमुक्त दुनिया के लिए भारत का प्रण
बैठक के अंत में भारत ने BRICS सदस्य देशों के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने कहा कि सुरक्षित और आतंकमुक्त दुनिया के निर्माण के लिए साझा रणनीति और समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है। नई दिल्ली में हुई यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद, साइबर कट्टरपंथ और आतंकी नेटवर्क को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

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