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आर्थिक तंगी से चाहिए मुक्ति, तो वैशाख के पूरे महीने करें 5 महा मंत्रों का जप

 आर्थिक तंगी से चाहिए मुक्ति, तो वैशाख के पूरे महीने करें 5 महा मंत्रों का जप
वैशाख माह को माधव मास भी कहा जाता है। इन नाम से ही ज्ञात होता है कि यह माह विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा के समर्पित है। यह महीना भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ दान-पुण्य और तर्पण आदि के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है। आप इस माह में भगवान विष्णु के मंत्रों का जप कर उनकी असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।




वैशाख माह का महत्व
"न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्"।

स्कंद पुराण (वैष्णव खण्ड) के इस श्लोक में वैशाख मास की महिमा बताई गई है। इस श्लोक का अर्थ है कि वैशाख के समान कोई महीना नहीं है, जिस तरह सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।

वैशाख माह हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना है, जो अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस माह में विष्णु जी की आराधना करने से साधक को अक्षय पुण्य, सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही यह भी माना गया है कि इस माह में किए गए जप, तप, दान और स्नान का फल 'अक्षय' होता है, अर्थात जो कभी समाप्त नहीं होता।

भगवान विष्णु के मंत्र -
1. विष्णु मूल का मंत्र - ॐ नमोः नारायणाय॥

2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

3. विष्णु गायत्री मंत्र -
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

4. मङ्गलम् भगवान विष्णु मंत्र -
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

5. विष्णु शान्ताकारम् मंत्र -
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

जरूर करें ये काम
वैशाख में भगवान विष्णु के पूजन के साथ-साथ तीर्थ में स्नान, पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व है।
सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या फिर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
वैशाख महीने में भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग लगाएं और उसमें एक तुलसी का पत्ता जरूर डालें।
इस महीने में दान करने का बहुत महत्व है, ऐसे में आप जल, अन्न, सत्तू, छाता, पंखा और मौसमी फलों का दान कर सकते हैं।
वैशाख माह में रोजाना सुबह-शाम तुलसी की पूजा कर दीपक जलाएं और जल अर्पित (रविवार और एकादशी को छोड़कर) करें।

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