भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर - केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
भारत की संस्कृति का आभूषण है बस्तर - केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना
हा कि बस्तर जैसी संस्कृति विश्व के किसी देश में नहीं है और इसे प्रभु राम के समय से संजोकर यहां के लोगों ने अक्षुण्ण बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 700 से अधिक जनजातियों की आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को पुनर्जीवित करने धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना जैसी अनेक योजनाएं लागू की। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक हो माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे।
उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्रों में उन्हें रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है।
बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, यह बस्तर की पहचान का उत्सव- मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर पंडुम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि माता दंतेश्वरी से ही बस्तर की पहचान है। बस्तर पंडुम एक आयोजन बस नहीं है, बल्कि यह बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के प्रति गृह मंत्री अमित शाह के स्नेह और लगाव के लिए आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार भी शाह की मौजूदगी ने बस्तरवासियों का हौसला बढ़ाया था और आज फिर उनकी उपस्थिति ने कलाकारों और यहां के लोगों में नई ऊर्जा भर रही है।
समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम का आयोजन
साय ने कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश- दुनिया के सामने लाने बस्तर पंडुम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों, प्रतिभागियों को बधाईयां। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष 47 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भाग लिया और इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने इसमें हिस्सा लिया है और बस्तर की संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, स्थानीय साहित्य, लोकनृत्य, गीत, शिल्प, बस्तरिया पेय, औषधि चित्रकला, वाद्ययंत्र, नाटक की विद्या सहित 12 विद्याओं का प्रदर्शन कलाकारों के द्वारा किया गया। बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-दुनिया के समक्ष प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का काम किया गया।
बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की भूमि बन चुकी है। यह नए भारत का नया बस्तर है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से बस्तर के विकास की चर्चा देश भर में हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले बस्तर की चर्चा देश भर में माओवादी के नाम से होती थी, किन्तु अब बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और समृद्ध विरासत की चर्चा होने लगी है।
बस्तर तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की सुंदर धरती लंबे समय तक नक्सलवाद की पीड़ा से गुजरी है। गौर, माड़िया, मुरिया, भतरा, धुरवा, गोंड जैसे विभिन्न नृत्य की लय धीमी पड़ गई थी, मांदर की थाप खामोश हो गई थी, लेकिन आज बस्तर बदल रहा है। यहां तरक्की की एक नई सुबह देखने को मिल रही है। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करेंगे।
आत्म समर्पण नीति के तहत सम्मान के साथ पुनर्वास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने घने जंगलों में, विपरीत परिस्थितियों में, अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार कर रहे हैं। नियद नेल्ला नार - (आपका अच्छा गांव) योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं गांव में पहुंचाई हैं। आत्मसमर्पण नीति को और अधिक मानवीय और संवदेनशील बनाया है, जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका सम्मान के साथ पुनर्वास कराया जा रहा है।
पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में भी बस्तर के विकास की चर्चा की। साय ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है। धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया जाना हम सभी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म, होम-स्टे, ट्रेकिंग जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार सतत पर्यत्नशील है, जिससे बस्तर ही नहीं छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, सभ्यता की जानकारी पर्यटकों को मिल सके और पर्यटन छत्तीसगढ़ की ओर आर्कर्षित हो सके।
उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर पांडुम के भव्य आयोजन से बस्तर की समृद्ध और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति की सराहना करते हुए क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और स्थायी शांति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। शर्मा ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने छेरछेरा पंडुम, तिहार और विजा पंडुम जैसे पारंपरिक उत्सवों को जनजातीय जीवन, प्रकृति और कृषि से जुड़ी अमूल्य परंपराएं बताया। नक्सलवाद पर दृढ़ प्रहार की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर के दूरस्थ और उपेक्षित क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय ध्वज की उपस्थिति पहुँची है, जो विकास और विश्वास की नई शुरुआत है। शर्मा ने बस्तर पांडुम को समाज-नेतृत्वत आयोजन बताते हुए कहा कि इसके असली सूत्रधार मांझी-चालकी, गयाता और पुजारी जैसे पारंपरिक समाज प्रमुख हैं, जिनके सहयोग से बस्तर पंडुम का आयोजन सफल हुआ। उन्होंने इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले सभी के प्रति आभार प्रकट किया।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बस्तर पंडुम 2026 के उद्देश्य और 12 विद्याओं पर भाग लेने वाले कलाकारो की विस्तृत जानकारी दी, और कहा कि यह आयोजन बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा जिससे हमारी संस्कृति और सभ्यता की जानकारी लोगों तक पहुंचेगी।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, पद्म अजय मंडावी, मती बुधरी ताती, हेमचंद मांझी, पंडीराम मांझी, सांसद भोजराज नाग, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सु लता उसेंडी सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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