EPF निकासी अब और आसान
EPF निकासी अब और आसान
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने करीब आठ करोड़ अंशधारकों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि श्रम मंत्रालय की एक नई योजना के तहत, अब ईपीएफ सदस्य अपने भविष्य निधि (ईपीएफ) का एक बड़ा हिस्सा सीधे 'यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस' (यूपीआई) के माध्यम से निकाल सकेंगे। इस नई व्यवस्था के अप्रैल तक शुरू होने की उम्मीद है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निकासी की प्रक्रिया को सरल बनाना और उन समय लेने वाले दावों से छुटकारा दिलाना है।
कैसे काम करेगी यूपीआई आधारित निकासी?
प्रस्तावित प्रणाली के तहत, ईपीएफओ के सदस्यों को उनके बैंक खाते से जुड़े यूपीआई गेटवे के माध्यम से पात्रता के अनुसार बैलेंस दिखाई देगा।
सुरक्षित ट्रांजैक्शन: सदस्य अपने लिंक्ड यूपीआई पिन (UPI PIN) का उपयोग करके सुरक्षित रूप से पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे।
उपयोग की स्वतंत्रता: एक बार पैसा बैंक खाते में आने के बाद, सदस्य इसे एटीएम से निकाल सकते हैं या डिजिटल भुगतान के लिए उपयोग कर सकते हैं।
फ्रीजिंग मैकेनिज्म: सुरक्षा और भविष्य की बचत सुनिश्चित करने के लिए, ईपीएफ राशि का एक हिस्सा 'फ्रीज' रखा जाएगा, जबकि शेष बड़ी राशि निकासी के लिए उपलब्ध होगी।
नए नियमों में क्या खास?
ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने आंशिक निकासी के प्रावधानों को उदार और सरल बनाने की मंजूरी दे दी है। नए नियमों के अनुसार-
न्यूनतम बैलेंस: सदस्यों को अपने खाते में कुल योगदान का 25% हिस्सा हमेशा 'न्यूनतम शेष' के रूप में बनाए रखना होगा।
निकासी सीमा: सदस्य भविष्य निधि के पात्र बैलेंस का 100% तक (कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा मिलाकर) निकाल सकेंगे, बशर्ते 25% रिजर्व बना रहे।
ब्याज का लाभ: इस 25% राशि को सुरक्षित रखने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदस्यों को 8.25% की वर्तमान ब्याज दर और कंपाउंडिंग का लाभ मिलता रहे, जिससे सेवानिवृत्ति के समय एक बड़ा कोष जमा हो सके।
किन 13 नियमों का विलय किया गया?
प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए, सरकार ने आंशिक निकासी के 13 जटिल प्रावधानों को समाप्त कर उन्हें केवल तीन श्रेणियों में समाहित कर दिया है: अनिवार्य आवश्यकताएं (बीमारी, शिक्षा, विवाह), आवास की आवश्यकताएं और विशेष परिस्थितियां। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया द्वारा बैठक के मिनट्स को मंजूरी मिलने के बाद इन प्रावधानों को जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा।
ईपीएफओ को क्या फायदा होगा?
वर्तमान में, ईपीएफओ को हर साल लगभग 5 करोड़ दावों का निपटान करना पड़ता है, जिनमें से अधिकांश निकासी से संबंधित होते हैं। हालांकि, वर्तमान 'ऑटो-सेटलमेंट' मोड के तहत 5 लाख रुपये तक के दावे तीन दिनों के भीतर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के निपटाए जा रहे हैं, लेकिन यूपीआई से जुड़ने पर यह समय और भी कम हो जाएगा।
ईपीएफओ के पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है, इसलिए वह सीधे भुगतान नहीं कर सकता, लेकिन बैंक खातों के साथ यूपीआई इंटीग्रेशन के माध्यम से वह बैंकिंग सेवाओं जैसी ही सेवा देने की ओर की ओर अग्रसर है। वर्तमान में संगठन सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों को दूर करने पर काम कर रहा है ताकि अप्रैल से यह सुविधा निर्बाध रूप से शुरू हो सके।

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