केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, दिल्ली में कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में
केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, दिल्ली में कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े केस में उनकी जमानत के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार को इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आज वरिष्ठ वकील उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मामले की सुनवाई कुछ दिनों के लिए टाल दी जाए। इसपर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार महीने बाद यानी 8 मई को निर्धारित की है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में दी थी अंतरिम जमानत
दरअसल, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल धन शोधन और भ्रष्टाचार के मामलों में 21 मार्च और 26 जून 2024 को ईडी और सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत दी थी। इसके साथ ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता के पहलू पर तीन सवालों को बड़ी बेंच के पास भेजा था। इसके पहले 20 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर केजरीवाल को जमानत दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसपर रोक लगा दी थी।
दिल्ली की विवादित आबकारी नीति से जुड़ा है मामला
यह मामला दिल्ली की विवादास्पद उस आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसे लागू करने के बाद साल 2022 में उस समय निरस्त कर दिया गया था, जब उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना ने इसके जांच के आदेश दिए थे। उपराज्यपाल ने इस नीति को तैयार करने और इसके कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की आशंका जताई थी। साथ ही सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई और ईडी ने अपनी जांच के बाद कहा कि दिल्ली की आबकारी नीति में संशोधन के दौरान अनिमितताएं की गई हैं और लाइसेंस धारकों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया।
जमानत के विरोध में हाईकोर्ट क्यों पहुंची ईडी?
ईडी सूत्रों की मानें तो प्रवर्तन निदेशालय का मानना है कि ट्रायल कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) जैसे सख्त कानून में जमानत देते समय कानून की सही कसौटियों की अनदेखी की है। इससे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की वैधानिक शक्तियां कमजोर होती हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जुलाई 2024 में अंतरिम जमानत दी, जिसे स्थायी जमानत नहीं माना जाता। इसके अलावा तीन सवालों को बड़ी बेंच के सामने भेजा गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रोक दिया, जबकि जमानत निरस्त नहीं की।

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