देवी सरस्वती की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

 देवी सरस्वती की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

साल 2026 में वसंत पंचमी का पावन पर्व ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए तैयार है। चारों तरफ पीली सरसों और प्रकृति का नया रूप मन को मोह लेता है। लेकिन, धर्म सिंधु और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि इस दिन कुछ खास गलतियां करने से पूजा का फल नहीं मिलता, बल्कि 'विद्या दोष' लग सकता है। अक्सर हम अनजाने में श्रद्धा के साथ-साथ कुछ ऐसी भूल कर बैठते हैं जो मां शारदा को नाराज कर सकती हैं।



आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में जिनसे आपको और आपके बच्चों को बचना चाहिए-

1. काले रंग के कपड़ों से बनाएं दूरी

वसंत पंचमी को 'पीला त्योहार' भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काला या लाल रंग पहनने से बचना चाहिए। काला रंग नकारात्मकता और शोक का प्रतीक माना जाता है। मां सरस्वती को पीला और सफेद रंग सबसे अधिक प्रिय है। इसलिए, पूजा के दौरान पीले वस्त्र धारण करना ही श्रेष्ठ माना गया है, जो सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।


2. कलम और किताबों का अपमान (विद्या दोष)

इस दिन सबसे बड़ी गलती जो लोग अक्सर करते हैं, वह है पढ़ाई-लिखाई की चीजों का अनादर करना। शास्त्रों में कहा गया है कि वसंत पंचमी के दिन कलम, किताब या वाद्य यंत्रों (Musical Instruments) को पैर नहीं लगाना चाहिए। ऐसा करना सीधे तौर पर 'विद्या दोष' को निमंत्रण देना है। कई क्षेत्रों में लोक परंपरा यह भी है कि इस दिन विद्यार्थी अपनी किताबों की पूजा करते हैं, लेकिन उस दिन पढ़ाई नहीं करते, ताकि विद्या को विश्राम और सम्मान दिया जा सके।


3. वाणी पर संयम और भोजन के नियम

मां सरस्वती को 'वाक देवी' (वाणी की देवी) भी कहा जाता है। धार्मिक जानकारों का मत है कि इस दिन किसी को भी अपशब्द बोलने, झगड़ा करने या झूठ बोलने से बचना चाहिए। अगर आप इस दिन कड़वे शब्द और अपशब्द बोलते हैं, तो माना जाता है कि मां सरस्वती आपकी जुबान पर नहीं विराजतीं।


इसके अलावा, सात्विक भोजन के नियमों के मुताबिक, वसंत पंचमी के दिन घर में मांस-मदिरा या प्याज-लहसुन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। सात्विक और शुद्ध भोजन ही इस दिन की पवित्रता को बनाए रखता है।

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