अमेरिका में 75 देशों के नागरिकों की ‘No Entry’
अमेरिका में 75 देशों के नागरिकों की ‘No Entry’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति आक्रामक रूप से लागू करना शुरू कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए दुनिया के 75 देशों के नागरिकों के लिए नए वीज़ा जारी करने पर अनिश्चितकाल के लिए रोक (Donald Trump Visa Ban List) लगा दी है। इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें कई विकासशील और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध आव्रजन (Illegal Immigration) रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जिन देशों की सरकारें (US Immigration Policy 2026)अपने उन नागरिकों को वापस लेने में सहयोग नहीं कर रही हैं, जिन्हें अमेरिका से निर्वासित (Deport) किया गया है, उन्हें अब वीज़ा प्रतिबंधों (Visa Restrictions) का सामना करना होगा। ट्रंप ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि वे अमेरिकी सीमाओं की सुरक्षा करेंगे और यह फैसला उसी दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस फैसले से कौन से देश हैं प्रभावित ?
हालांकि प्रतिबंधित देशों की आधिकारिक सूची में बदलाव होते रहते हैं, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक इसमें अफ्रीकी, एशियाई और दक्षिण अमेरिकी देशों की बड़ी संख्या शामिल है। इन देशों के नागरिकों के लिए अब बिजनेस (B1) और टूरिस्ट (B2) वीज़ा प्राप्त करना लगभग नामुमकिन हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ये देश अमेरिकी शर्तों को नहीं मानते, तब तक उनके नागरिकों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद रहेंगे।
छात्रों और कामगारों पर भी संकट
इस पाबंदी का असर न केवल पर्यटकों पर, बल्कि उन छात्रों और पेशेवरों पर भी पड़ सकता है, जो नए शैक्षणिक सत्र या रोजगार के लिए अमेरिका जाने की योजना बना रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से अमेरिका के शिक्षा उद्योग और तकनीकी क्षेत्र में मैनपावर की कमी हो सकती है। हालांकि, मौजूदा वीज़ा धारकों के लिए अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे लाखों प्रवासियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है।
मानवाधिकार संगठनों ने फैसले को 'भेदभावपूर्ण' बताया
वैश्विक प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को 'भेदभावपूर्ण' बताया है। प्रभावित देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के खिलाफ बताया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी जनता: ट्रंप समर्थकों ने इसे 'ऐतिहासिक और साहसी' कदम बताया है, जबकि विपक्षी डेमोक्रेट्स इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और छवि के लिए घातक मान रहे हैं।

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