Online Shopping: ऑनलाइन खरीदते हैं ग्रॉसरी तो इस तरह कर सकते हैं एमआरपी पर 30 पर्सेंट से भी ज्यादा की बचत



Online Shopping: आज के समय में ग्रॉसरी की ऑनलाइन खरीदारी का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. खासकर शहरों में लोग रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी ऑनलाइन मंगाने लग गए हैं. क्विक कॉमर्स के चलन में आने से इसमें और सहूलियत होने लग गई है. ऑनलाइन सामान मंगाने से लोगों के समय की तो बचत होती ही है, साथ ही साथ थोड़ा ध्यान देने पर पैसे की भी अच्छी-खासी बचत की जा सकती है.



सीएलएसए के मॉर्निंग नोट में अपडेट


एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अगर ग्रॉसरी की ऑनलाइन खरीदते समय थोड़ा ध्यान दिया जाए तो एमआरपी पर 30 फीसदी से भी ज्यादा की बचत की जा सकती है. यह दिलचस्प जानकारी सामने आई है ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए के मॉर्निंग नोट में. सीएलएसए इंडिया ने 21 दिसंबर के मॉर्निंग नोट में विभिन्न ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म पर सामानों की कीमतें, उन पर मिल रहे डिस्काउंट, डिलीवरी चार्ज आदि की तुलना कर विस्तार से जानकारी दी है.


क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के डिस्काउंट


रिसर्च नोट में सीएलएसए ने स्मॉल कार्ट चेक में बताया है कि क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म लिस्टेड एमआरपी की तुलना में ठीक-ठाक कम दाम पर सामान दे रहे हैं. स्मॉल कार्ट कैटेगरी में ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और जेप्टो एमआरपी की तुलना में क्रमश: 23 पर्सेंट, 19 पर्सेंट और 24 पर्सेंट कर डिस्काउंट ऑफर कर रहे हैं. मतलब ब्लिंकिट और जेप्टो पर कीमतें लगभग आस-पास हैं, लेकिन इंस्टामार्ट पर तुलनात्मक रूप से कम डिस्काउंट मिल रहा है. तीनों कंपनियां कुछ हैंडलिंग चार्ज वसूल रही हैं, जिससे डिस्काउंट कुछ कम हो जा रहा है. वहीं ब्लिंकिट पर औसतन प्रति उत्पाद सबसे कम कीमतें हैं, लेकिन यह प्लेटफॉर्म डिलीवरी फी भी ले रहा है.


क्विक कॉमर्स से सस्ते हैं डीप डिस्काउंटर


दूसरी ओर जियोमार्ट और डीमार्ट जैसे डीप डिस्काउंट प्लेटफॉर्म पर फाइनल डिस्काउंट एमआरपी के 30 फीसदी के आस-पास बैठ रहा है. ये प्लेटफॉर्म क्विक कॉमर्स की तुलना में 7 से 13 पर्सेंट तक सस्ते साबित हो रहे हैं. डीमार्ट पर कीमतें सबसे कम हैं और एमआरपी की तुलना में 33 पर्सेंट तक डिस्काउंट पर सामान मिल जा रहे हैं. हालांकि डीमार्ट के मामले में 49 रुपये की डिलीवरी फी से स्मॉलकार्ट में इफेक्टिव गैप कम हो जा रहा है. वहीं जियोमार्ट स्मॉल कार्ट के मामले में डीमार्ट की तुलना में 20 साबित हो रहा है, क्योंकि इस प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी फी नहीं ली जा रही है.



इस तरह से कार्ट का कैटेगराइजेशन

कार्ट में खरीदे जा रहे सामानों की कुल कीमत के आधार पर कैटेगरी तय की गई है. अगर कुल सामान 800 रुपये से 1,600 रुपये के बीच हो रहे हैं, तो वे स्मॉल कार्ट कहलाते हैं. वहीं 1,600 रुपये से ज्यादा की वैल्यू के सामानों के मामले में कैटेगरी लार्ज कार्ट हो जाती है. अगर 1,600 रुपये से ज्यादा के सामान खरीदे जा रहे हों तो फिर डीमार्ट से खरीदना सबसे फायदे का सौदा साबित हो जाता है.

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