Google Analytics केंद्रीय मंत्री पुत्र का भाजपा नेताओ ने पलक पाँवड़े बिछा किया स्वागत! - Pipariya Peoples latest News update

केंद्रीय मंत्री पुत्र का भाजपा नेताओ ने पलक पाँवड़े बिछा किया स्वागत!


 पिपरियाः-भारतीय जनता पार्टी में आलाकमान भले ही पार्टी में वंशवाद व परिवारवाद के विरोध का ढोल पीटते रहे परंतु भाजपा में समय-समय पर ऐसी कई तस्वीर व सार्वजनिक आयोजन वायरल हो जाया करते है जिससे भाजपा में वंशवाद की अमर बेल के विकास से इंकार नहीं किया जा सकता है।अभी तक तो पिपरिया में स्थानीय भाजपा नेताओ के पुत्रों को आगे बढ़ाने की परंपरा एवं गुणगान गया जा रहा था।परंतु अब तो केंद्रीय मंत्री के पुत्र तक के भव्य स्वागत कार्यक्रमो का आयोजन किया जाने लगा है।इस स्वागत कार्यक्रम से स्थानीय भाजपा नेताओ ने यह जता दिया है की पार्टी में न केवल वंशवाद की परंपरा ज़िंदा है बल्कि कई नेताओं का तो यह ध्येय हो गया है की सत्ताधारी दल के किसी भी नेता या नेता परिजन सहित जो भी नगर में आ जाए उसका भव्य स्वागत तो करना ही है।ऐसा ही द्र्श्य आज पिपरिया में तब देखने को मिला जब केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र प्रबल प्रताप सिंह का पिपरिया दौरा हुआ।केंद्रीय मंत्री पुत्र के क़ाफ़िले के वाहन देख आम जनता को लगा की कोई बड़ा मंत्री सन्तरी आ रहा है।मंत्री पुत्र की इस रैली में पुलिस व्यवस्था इतनी चाक चौबंद दिखी जितनी पिछले दिनो नगर में हुई किसी बड़ी आपराधिक घटना के दौरान भी नहीं थी।मंत्री पुत्र प्रबल प्रताप का स्वागत करने में भाजपा नेताओ में होड़ सी दिखाई दी।पार्टी का वरिष्ठ नेता हो या कनिष्ठ हर कोई केंद्रीय मंत्री पुत्र को रैली में अपना चेहरा दिखा कर नम्बर बढ़वाने में जुटा रहा।इस पूरे कार्यक्रम में एक बात बड़ी ग़ज़ब की रही मंत्री पुत्र की शान में बड़े-बड़े बैनरो से शहर को पाट दिया गया था।कार्यक्रम के बाद हर कोई भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह के साथ अपनी नज़दीकी जताने वाली फ़ोटो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर क़सीदे पढ़ रहा था।प्रबल प्रताप सिंह ने भी अपने भाषण में यह स्वीकार किया कि उन्हें नहीं पता था की पिपरिया वाले उनको इतना प्रेम करते है।यदि पता होता तो कई साल पहले यंहा आ ज़ाया करता।इस पूरे कार्यक्रम को देखने वाले भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता का कहना था की यह नए जमाने की पार्टी है।ऐसा तो होता ही रहेगा।पार्टी में वंशवाद और परिवारवाद आम कार्यकर्ता के लिए है। “बाँकी समरथ को नहीं दोष गुनसाइ”

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