Google Analytics जान कर भी अनजान बना कृषी विभाग,कांट्रेक्ट फार्मिंग में कितने हिस्सेदार! - Pipariya Peoples latest News update

जान कर भी अनजान बना कृषी विभाग,कांट्रेक्ट फार्मिंग में कितने हिस्सेदार!



पिपरिया-:इन दिनों इलाके के किसानों को गुमराह कर कांट्रेक्ट फार्मिंग कराई जा रही हैं।देश में बड़ी बड़ी कंपनियां कांट्रेक्ट फार्मिंग करवा रही हैं।परंतु पिपरिया सहित होशंगाबाद जिले में धान की बम्पर फसल को भुनाने के लिए यंहा कीटनाशक दुकानदारों ने अधिकांश किसानों से फर्जी अनुबंध कर लिए हैं।यह अनुबंध किसी भी कंपनी के नाम धान खरीदने को लेकर हुआ करते हैं।जिनका कोई भी कागज किसानों के पास नहीं रहता हैं।कई दुकानदार अपने रजिस्टरों में किसान का नाम और गांव लिख कर अनुबंध की प्रक्रिया को पूरा बताते हैं। इन भोले-भाले किसानों को बाजार भाव से धान के 50 रुपये ज्यादा देने का लालच दिया जाता हैं।इसके बदले कीटनाशक दुकानदार पहले ऊंचे भाव का बीज बेचता हैं।इसके साथ ही इसी दुकानदार की बताई कीटनाशक दवाई फसल में डालने के लिए किसानों को मजबूर किया जाता हैं।जो की बाजार भाव से कई गुना ज्यादा होती हैं।यह ऐसे कीटनाशक दुकानदार हैं जिनके पास फसल को खरीदने का कोई भी अधिकृत लायसेंस नहीं होता हैं।किसान को अधिक भाव और खलियान से ही फसल तुलाई का लालच दे कर यह कीटनाशक दुकानदार हजारो रुपये पहले ही दवाइयों में कमा लिया करते हैं।फिर धान खरीदी के समय इन दुकानदारो द्वारा दी गई उधार कीटनाशक दवाइयों का बकाया बिल काट लिया जाता हैं।उसके बाद ही किसान के हाथ बची हुई रकम लगती हैं।इस पूरे मामले की जानकारी कृषी विभाग को रहा करती हैं।परंतु फिर भी इस गौरखधंधे पर जान कर भी अनजान बने कृषी विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणली किसानों के हितों में नहीं दिखाई देती हैं।वर्षो से जमे जिला कृषी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ही किसानों को कांट्रेक्ट फार्मिंग के नाम से होशंगाबाद जिले में लूटा जा रहा हैं।जबकी इन कीटनाशक दुकानदारो के पास धान का बीज बेंचते समय भी बीज विक्रेता का लाइसेंस नहीं हुआ करता हैं और न ही वह बीज का कोई पक्का बिल किसानों को देते हैं।ऐसे में यदि अमानक बीज के कारण फसल खराब होती हैं तो कृषी अधिकारी किसानों से पहले बिल मांगते हैं।जबकि कृषी विभाग की जिम्मेदारी होती हैं कि वह सतत इस बात की मॉनिटरिंग करे की कोई भी दुकानदार बिना बिल के बीज और कीटनाशक दवाइयां न बेंचे परंतु यह मॉनिटरिंग सिर्फ कागजो में कर सरकार तक पहुंचा दी जाती हैं।इस पूरे मामले में समझा जा सकता हैं कि किसानों से कराई जा रही इस कांट्रेक्ट फार्मिंग में कितने हिस्सेदार हुआ करते हैं।जो अपना अपना हिस्सा लेकर आंख और मुंह दोनों बन्द कर लेते हैं।

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